बिलासपुर 22 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (हाउसिंग बोर्ड) का बिलासपुर कार्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। चर्चित ‘बादाम कांड’ से जुड़ी महिला अधिकारी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वायरल वीडियो में हाउसिंग बोर्ड में पदस्थ वरिष्ठ सहायक पूनम बंजारे और एक महिला के बीच तीखी बहस दिखाई दे रही है। वीडियो में महिला, NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जारी करने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगा रही है। हालांकि, पूनम बंजारे इन आरोपों से साफ इनकार करती नजर आ रही हैं और किसी भी प्रकार की राशि मांगने की बात को गलत बता रही हैं। वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान कार्यालय में कुछ समय के लिए हंगामे जैसी स्थिति भी बन गई।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी कार्यालय में नामांतरण की फाइल लंबित रहने से नाराज एक युवक ने ‘बादाम कांड’ किया था। युवक ने अधिकारियों की “याददाश्त बढ़ाने” के तंज में टेबल पर बादाम फेंकते हुए वीडियो बनाया था, जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। उस मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी पूनम बंजारे का तबादला कर दिया था।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाउसिंग बोर्ड में नामांतरण और NOC जैसे जरूरी कार्यों के लिए आम लोगों को बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं। आवेदन के बावजूद फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल इस नए वायरल वीडियो को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने पर ही मामले की जांच की जाएगी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं
पीड़ित महिला ने वीडियो में कहा कि फोन पर उसे बताया गया था कि फाइल पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और दस्तावेज तैयार हैं, लेकिन जब वह कार्यालय पहुंची तो फिर पैसों की मांग सामने आ गई। उसने यह भी कहा कि बीमार होने के बावजूद उसे बार-बार बुलाया जा रहा है |
घूस लेने के बाद भी महीनों बाद लोगों का होता था कार्य
स्थानीय लोगों के अनुसार महिला अधिकारी पूनम बंजारे तिफरा हाउसिंग बोर्ड में ज्वाइन होते ही एक महिला असिस्टेंट रखी थी। वह दफ्तर में आने वाली सभी व्यक्तियों से काम के बदले घूस की डिमांड करती और एक से दो महीने का समय लेती थी।
उसके अनुसार पैसे नहीं मिलने पर वह कई फरियादियों का फाइल अटका देती जिससे वह दुबारा पैसा देकर फाइल लेने पर मजबूर होते थे। लोग घर खरीदने के बाद महीनों दफ्तर का चक्कर लगा रहे थे।


